Maharashtra Politics:शरद पवार की पटकथा दोहरायी अजीत पवार ?

शरद पवार कें मौजुदगी में महाराष्ट्र विपक्ष के नेता अजीत पवार ने इस्तीफा के पेशकस की उनका कहना है है कि संगठन में कोई भी पद चाहिए। विपक्ष नेता के तौर पर विधायको के मांग पर जिम्मेदारी स्वीकार किया था।
मुम्बई।। शरद पवार के इस्तीफा के पटकथा  को डेढ़ महीने पहले किया गया था वही उनके भातीजा और विपक्ष के नेता अजीत पवार ने दोहरा दी। 2 मई को शरद पवार ने राष्ट्रीय अध्यक्ष के पद से इस्तिफा देने का ऐलान किया था। लेकिन संगठन के नेताओ द्वारा मान मनोव्वल करने पर  जिम्मदारी के लिए राजी हो गये थे। लेकिन अब यही कहानी  उनके भतीजे अजीत पवार ने नेता प्रतिपक्ष का पद छोड़ने की इच्छा जताई है। यह घोषणा बुधवार को एक कार्यक्रम में किया जिसमें राष्ट्रीय अध्यक्ष शरद पवार के मौजुदगी में कहा की मै नेता प्रतिपक्ष के भूमिका के लिए तैयार नही था लेकिन पार्टी के मांग पर स्वीकार कर ली थी।
अजीत पवार ने कहा कि इसकी बजाय संगठन में भूमिका चाहता हूं। जो भी पद मिलेगा  पूरे न्याय संगत  के साथ काम करूगा। इस्तीफा के पीछे सुप्रिया सुले और प्रफुल्ल पटेल को प्रमोशन के लेकर देखा जा रहा है। पार्टी में अजीत पवार के करीबी सू़त्रो का कहना हैं कि शरद पवार ने इस्तीफा का दाव चला था फिर भावुक महौल बनाते हुए वापस ले लिया । इससे उनके ताकत में भी बढ़ोत्तरी हुआ और  अंत में बेटी सुप्रिया सुले को कार्यकारी अध्यक्ष बना दिया इससे संकेत दिया की पार्टी की उत्तराधिकारी वही है।
क्या प्रदेश अध्यक्ष की कुर्सी पर नजर ?
अजीत पवार का नेता प्रतिपक्ष का पद विधान सभा के बाहर कुछ मायने नही रखता है। इसी लिए अपना दाव खेले है उनकी नजर प्रदेश अध्यक्ष की कुर्सी पर है जिससे पार्टी और प्रदेश में उनकी पकड़ मजबूत होगी । उनको भी पता है कि पार्टी देशभर में विस्तार है लेकिन मुख्य पकड़ महाराष्ट्र में है जो प्रदेश अध्यक्ष पद अहम हैं, वर्तमान में जयंत पाटिल है। वो चाहते है कि वह पद मिल जाये जिससे भविष्य गेम में राजनीतिक पकड़ मजबूत कर सके।
सुप्रिये सुले ने कहा कि संगठन में कुछ बनेगें तो खुशी होगी 
सुप्रिया सुले ने कहा कि बहन के तौर पर मै चाहूगी की अजीत दादा की इच्छा पूरी हो । इसका निर्णय संगठन करेगा कि पार्टी में पद दिया जाय या नही। लेकिन खुशी होगी, यदि संगठन के लिए काम करते हैं। इससे कार्यकर्ता  प्रोत्साहित होगें लेकिन प्रदेश अध्यक्ष बनाया जायेगा या नही] ये तो निर्णय पार्टी की होगी। भाई की इच्छा पूरी होती हैं तो बहन के तौर पर खुशी होगी।

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