Katni News:भगवान चंद्र प्रभु के गर्व दिवस के अवसर मुनि सागर की शांति धारा

भगवान चंद्र प्रभु के गर्व दिवस के अवसर मुनि श्री समता यू सागर जी ने सुबह शांति धारा हुई।भगवान की आरती के बाद विनय भैया जी ने विनय पाठ,पूजा पाठ कराया।
मुनि श्री समता सागर जी ने कहा कि पंच कल्यायक जो हुकुमचंद जैन बंगला मंदिर के परिवार जनों ने कराया उसमे 90% पात्र इसी परिवार के लोग बने उन्हे मालूम ही नही की कौन कौन सा पात्र बना लेकिन पात्र बनने की होड़ लग गई थी।क्योंकि उनके दादा हुकुमचंद जैन के मंदिर का भव्य तीन मंजिला मंदिर बन रहा है।
मुनि श्री निष्कम्प सागर जी ने अपने प्रवचन में विस्तार पूर्वक बताया अनादि काल से सांसारिक प्राणी 84 लाख योनियों में भटक रहा है,उस जीव का अभी तक कल्याण नही हुआ है।हमने अन्नतो काल,अन्नतो प्रयास किया है ऐसी कोई भी पर्याय नही जिस पर्याय में जीव न गया हो कल्याण के बहुत सारे रास्ते और बहुत सारे मार्ग भी हमको प्राप्त हुए है सच्चे अच्छे दिगंबर गुरु भी हमको प्राप्त हुए,जीव अच्छे सच्चे गुरु को मानता तो है,लेकिन गुरु की बात नही मानता। हमने कैसी कैसी पर्याय को धारण किया।जब हम अपना अतीत को देखते हैं तो बंधुओ अतीत अगर हमारे स्मरण में आ जाय तो में कहता हूं की व्यक्ति पाप करना बन्द कर देगा।
हम जिनवाणी मां का स्वाध्याय करते है,तो हमको समझ में आता है की हमारा अतीत क्या था।जिनवाणी को पढ़ने के बाद ज्ञात होता है कि 84 लाख योनियों में भटकता भटकता रहता है।कई योनियों में जन्म लिया।जिस घास पर हम चलते है उस घास में भी हमने जन्म लिया,जिस अग्नि का सेवन करते हो,जिस अग्नि के माध्यम से हमारे कार्य होते है उस अग्नि का भी हमने जन्म लिया। लेकिन हर वस्तु का हमने दुरुपयोग किया।जो हमारे लिए उपकारी है,उनका भी हमने दुरुपयोग किया और उन पर्याय को हमने भी अनेकों बार धारण किया।हमने ही नही जिनकी हम पंच कल्याणक महोत्सव मना रहे है उस जीव ने भी ये पर्याय को धारण किया ।मनुष्य पर्याय प्राप्त करने के बाद आप लोगो से यह कहना चाहता हूं कि जैसे उस जीव ने भी इतनी पर्याय को धारण करने के बाद जब मनुष्य पर्याय को धारण करा तो मनुष्य पर्याय धारण करने के बाद आज वो तीन लोक के नाथ गर्भ में आएंगे कल के दिन गर्भ कल्याण की जो क्रिया यहां पर हुई,आज उसी गर्भ की क्रिया यहां पर होगी कल भगवान का जन्म होगा।
बंधुओ ये पंच कल्यायक प्रतिष्ठा महा उत्सव कोई खेल नहीं है ये साक्षात पाषाण से परमात्मा बनने की वो प्रक्रिया है।जो गर्भ से लेकर मोक्ष कल्याण की यात्रा 5 दिनों के अंदर  यहां दिखाई जाती है।आप लोगो ने जो पात्र बनके,महापात्र बनके सौभाग्य प्राप्त किया है।आप लोगो का योगदान उस प्रक्रिया पंच कल्यायक में बहुत बड़ा योगदान है।
12 बजे भगवान के माता पिता बने राजकुमार/कल्पना जैन के निवास से हाथी,रथ में जलूस निकला जिनकी आगवानी कार्यक्रम स्थल में की गई।
कार्यक्रम स्थल के पास पात्र बने लोगो के अलावा,बाहर से आने वाले श्रद्धालुओं के सुबह,शाम भोजन की व्वस्था रखी गई हैं।
कार्यक्रम में मुनि श्री समता सागर जी,मुनि श्री निष्कम्प सागर जी,मुनि श्री महासागर, एलक मुनि श्री के सानिध्य में किया गया।

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